C-पथ Vs G-पथ – गांधी जयंती पर विशेष : पंकज दास
लेकिन एक दशक के उस भीषण द्वंद के आग को बुझाने के लिए गांधी जी का दो हथियार ही काफी था। एक सत्य और दूसरा अहिंसा।
पंकज दास, काठमांडू, 2 ऑक्टोबर । गांधी जी की प्रासंगिकता, गांधी जी के सिद्धांत, गांधी जी का विचार आज के समय में भी उतना ही महत्व है यह बातें तो पूरी दुनियां कहती है लेकिन नेपाल ने उसे अपनाया है, नेपाल ने दुनियां को उदाहरण दिया है कि अगर गांधी के सिद्धांत पर चले तो बडे से बडा परिवर्तन संभव है।
बहुत पहले जाने की आवश्यकता नहीं है। करीब एक दशक तक नेपाल सशस्त्र द्वंद की चपेट में था। लेकिन एक दशक के उस भीषण द्वंद के आग को बुझाने के लिए गांधी जी का दो हथियार ही काफी था। एक सत्य और दूसरा अहिंसा।
सशस्त्र संघर्ष करने के बाद, हजारों लोगों की जान जाने के बाद युद्ध करने वाले को सत्य का एहसास हो गया कि युद्ध से लक्ष्य को नहीं पाया जा सकता है। इस सत्य को स्वीकार करने के बाद जब अहिंसा का रास्ता अपनाया गया तो जो काम दस सालों में नहीं हो पाया वह साल दो साल में ही हो गया।
नेपाल में जिस प्रकार ढाई सौ वर्षों की व्यवस्था बदल गई पूरी दुनियां उससे चकित थी। यह युद्ध और हिंसा की आग में झुलस रहे मध्यपूर्व के देश हो या एशियाई कई देश हों नेपाल उन सभी के लिए उदाहरण है।
मैं आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के पहले नेपाल भ्रमण पर नेपाल के सम्मानित संविधान सभा को संबोधन के दौरान कही थी। उन्होंने कहा कि नेपाल के माओवादियों ने शस्त्र छोडकर शास्त्र अपनाया है वह पूरी दुनियां के लिए एक उदाहरण है। नेपाल के लोगों ने युद्ध का रास्ता छोड कर बुद्ध का रास्ता अपनाया है वह पूरी दुनियां के लिए एक बहुत बडा पाठ है।
ऐसा नहीं है कि यह बात उन्होंने सिर्फ यहां आए थे इसलिए आपलोगों को खुश करने के लिए कही है। जो बात उन्होंने जुलाई 2014 में नेपाल की संसद में कही वही बात उन्होंने 15 अगस्त को लाल किले के प्राचीर से भी कही थी और यहीं नहीं रूके यही बात उन्होंने सितम्बर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले भाषण में यूएन के मंच से पूरी दुनियां को संबोधित करते हुए भी कहा कि युद्ध उन्माद में रहे पूरी दुनियां के लिए नेपाल एक उदाहरण हो सकता है।
गांधी के पथ पर चलना, गांधी के सिद्धांतों को मानना, गांधी के द्वारा बताए गए विचारों का पालन करना, उनके आदर्शों के अनुरूप अपने आप को ढालना, गांधी पथ पर चलना इतना आसान नहीं है। उस रास्ते में कठिनाई है, तिरस्कार है, बहिष्कार है, आपकी आलोचना होती रहेगी, आपका विरोध होता रहेगा लेकिन अंत में जीत आपकी ही ही होगी। और जीत स्थायी होता है। हमें आगे ले जाता है। आज आप सभी महसूस कर रहे होंगे कि हमारा संविधान तो बन गया, देश अब आर्थिक प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, पूरी दुनिया की तरह हमारा भी सपना होगा कि हम भी उसी तेजी से आगे बढे लेकिन कोई ना कोई कमी जरूर खलती होगी। कहीं ना कहीं मन में टीस जरूर है कि कुछ ना कुछ हमसे छूट गया है, कहीं कुछ अधूरा सा रह गया है। अगर हम सच्चाई और ईमानदारीपूर्वक ढूंढे तो गांधी दर्शन और सिद्धांत में ही सभी राजनीतिक समस्याओं का समाधान आपको मिल जाएगा। मैं एक बार फिर अपने दूरद्रष्टा प्रधानमन्त्री के नेपाल भ्रमण के दौरान कही गई बातों को स्मरण कर रहा हूँ। जब वो दूसरी बार नेपाल आए तो सच्चे हिमायती, अच्छे पडोसी, एक बड़े भाई के नाते कुछ सुझाव दिया था. अगर आपको स्मरण हो तो उन्होंने उसी गांधीवादी विचारधारा के आधार पर आपलोगों के सामने कुछ बाते कही थी। यद्यपि उस सुझाव के बाद उनकी आलोचना भी खूब हुई, उनका विरोध भी खूब हुआ।
लेकिन जैसा मैंने पहले ही कह दिया कि गांधी के आदर्श, विचार और सिद्धांत को अपनाकर चलेंगे तो शुरू में तो आपकी आलोचना भी होगी विरोध भी होगा लेकिन जीत आपकी ही सुनिश्चित है। पहले भले ही आपके बातों का लोग विरोध करेंगे, लेकिन एक दिन आपकी ही बातों पर चलेंगे। मोदी जी ने अपने दूसरे भ्रमण के दौरान कहा कि आप संविधान चाहे जैसा बना दीजिए उससे हमें कोई लेना देना नहीं है। और होना भी नहीं चाहिए लेकिन संविधान ऐसा बने जिसमे सभी फूलों की महक हो। सभी समुदाय को उस संविधान के प्रति सम्मान हो, ममत्व हो, अपनापन महसूस हो।
अगर आपलोगों को याद हो तो स्मरण कीजिए कि जिस प्रकार गांधी जी समाज के हर तबके को साथ ले हाल्ने की बात करते हैं, समाज के कमजोर और पिछड़े तबके को भी सामान अवसर देने की बात करते हैं हमारे मोदी जी ने भी तो वही कहा था। उन्होंने कहा था कि संविधान सिर्फ कागज़ का दस्तावेज ना बने, संविधान सिर्फ धारा और उपधारा तक में सीमित ना रहे। वह एक ऐसा ग्रन्थ बने जिसकी पूजा देश का हर नागरिक करे। और उस संविधान को मानने के लिए उसका सामान करने के लिए बन्दुक की नोंक पर उसे बाध्य करना गांधीवादी विचार धरा नहीं है। यदि समाज के हर तबके की बात, समाज के हर क्षेत्र की बात, हर समुदाय की भावना को समेटा गया तो अपने आप यह गीता कुरआन बाइबल जैसा पवित्र ग्रन्थ बन सकता है।
लेकिन बुद्ध की देश में गांधी के विचारधारा को शायद कुछ लोग नहीं समझ पाए जिसका नतीजा आज आप सभी के सामने है। मैंने सूना है कि इस देश के हिमालय की गोद में रहने वाला समुदाय हो या पहाड़ों पर रहने वाले हमारे जनजाति भाई, या फिर तराई मधेश में रहने वाले इस देश के भूमि पुत्र हों सभी चाहते हैं कि हमारा संविधान दस्तावेज बन कर ना रह जाए यह एक ग्रन्थ बने ताकि सभी उसकी पूजा कर सके उसका सामान कर सके। बस यही बात मोदी जी ने उस समय कही थीं तो विरोध और आलोचना हुई थी। आज मैं कह रहा हूँ तो हो सकता है मेरा भी विरोध हो या मेरी भी आलोचना हो लेकिन एक दिन आपको एहसास होगा कि गांधीवादी विचारधारा, गांधीवादी सिद्धांत को अपना कर ही हम सभी को गले लगा सकते हैं।
आप ए पथ पर चले या बी पथ पर चले या सी पथ पर कोई फरक नहीं पड़ता है। लेकिन आपकी उन्नति, प्रगति सुखी समृद्धि का रास्ता जी पथ पर चलने से मिलेगी। जी पथ मतलब गांधी पथ। आज पूरा विश्व जी पथ को अपनाने की कोशिश कर रहा है। जिस तरह आज हम यहां नेपाल में गांधी जी की १५०वी जयंती मना रहे है उसी तरह पूरा विश्व आज उनके सिद्धांतों विचारो आदर्शों पर चर्चा कर रहा है। लेकिन मेरा आग्रह है कि पूरी दुनिया के लिए पूरी मानवता के लिए एक धोती पहन कर एक लाठी के सहारे एक चरखे के सहारे उस महामानव ने जो रास्ता दिखाया है, जो पथ बनाया है हम सभी उस पर चलने का प्रयास करेंगे तभी सही मायनों में आज के आयोजन का उद्देश्य पूरा हो सकता है।
नेपाल में दल कोई भी हो, शासन किसी का भी हो रास्ते छाए कुछ भी अपना लीजिए, विचार, दर्शन और सिद्धांत चाहे आप कोई भी मान लीजिए, ए से लेकर जेड तक में कोई भी पथ अपना लीजिए पर मानव कल्याण, विश्व कल्याण का आधार जी पथ से ही मिल सकता है। मैं आज कल यहां एक ही बात सुन रहा हूँ कि नेपाल अब सी पथ पर चलने वाला है। बहुत अच्छी बात है, हमारी शुभकामनाएं आपके साथ है और हमेशा ही बनी रहेगी। लेकिन एक बात का विचार आप अवश्य कीजिए।
सी पथ से आपको हो सकता है बहुत समृद्धि मिल जाए पर जीवन का सुकून आपको जी पथ से ही मिल सकता है। सी पथ से आपको ऊँची ऊँची बिल्डिंग बनाने का मौक़ा तो जाएगा लेकिन उसमे रहने वाले लोगों के बीच एक आपस का भाईचारा का संबंध आपको जी पथ के द्वारा ही आ सकता है। सी पथ से आप बहुत चौड़ी चौड़ी सड़के बना लेंगे, बुलेट ट्रेन चला लेंगे सारी भौतिक सुख-सुविधा से लैस हो जाएंगे लेकिन मानसिक सुख आध्यात्मिक सुख आपको जी पथ ही बता सकता है। हो सकता है सी पथ आपको सोने चांदी हीरा जवारात से एक बहुत बड़ा पिंजड़ा बना दे, चकाचौंध वाली दुनिया आपको सी पथ से मिल जाए लेकिन आजादी नहीं मिलेगी तो एक समय के बाद सभी बेकार लगने लगेगा। बोलने की आजादी, लिखने की आजादी, कुछ करने की आजादी तो हम सभी को जी पथ से ही मिल सकता है।
इस देश ने लोकतंत्र के लिए, बहुदलीय संसदीय व्यवस्था के लिए, वाक् स्वतन्त्रता के लिए, संघीयता के लिए बहुत कुर्बानियां भी दी है, बहुत लोगों के त्याग तपस्या और बलिदान के बाद आज नेपाल इस मुकाम पर पहुंचा है। लम्बे संघर्ष के बाद नेपाल राजनैतिक स्थायित्व को प्राप्त किया है। मेरा मानना है कि कोई भी आयातित विचारधारा के कारण हमारा लोकतंत्र ना खतरे में पड जाए? किसी ऐसे पथ के कारण अगर हमारी स्वतन्त्रता पर आंच आने लगे तो ऐसी विचारधार का क्या काम? हम हिंदुत्व को मानने वाले लोग हैं। हम विश्व बंधुत्व को मानने वाले लोग हैं। हम सर्वे भवन्तु सुखिन के सिद्धांत पर चलने वाले लोग हैं। हम वसुधैव कुटुम्कम के आदर्श पर चलने वाले लोग हैं।
इसलिए हमें प्रभावित करने के लिए हो सकता है हमारे सामने कोई ए पथ लाएगा कोई बी पथ लाएगा और कोई सी पथ लाएगा लेकिन हम उस परंपरा के लोग हैं जो किसी दूसरे के पथ पर नहीं चलते हैं हम एक ऐसा पथ हमारे पूर्वजों ने हमें दिया है कि आज पूरी दुनिया उस पथ पर चल रही है। हमने दुनिया को हमेशा ही रास्ता दिखाया है। और गांधी तथा उनकी विचारधारा पूरी दुनिया के लिए एक ऐसे धरोहर हैं जिनके बताए रास्ते पर चल कर हम सभी सुखी भी हो सकते हैं और समृद्ध भी हो सकते हैं।


