संघीयता किसी भी दृष्टि से ठीक नहीं:चित्रबहादुर केसी
देश को हठपर्ूवक संघीयता में धकेला जा रहा है। संघीयता से पहले ही भावनात्मक रुप से जनता विभाजित हो गई है। इस विभाजन को अंजाम दिया है, क्षेत्रीय, जातीय एवं साम्प्रदायिक दलों ने। अब भौगोलिक रुप में भी विभाजन हो गया तो परिणाम नकारात्मक होगा। अब तो देश संघीयता में चला ही जायगा, क्यों विरोध का विगुल बजाया जाय, विरोध करने से क्या होगा, ऐसा सोचना गलत होगा। हम तो और सशक्त रुप से विरोध में उतरेंगे। परिणाम ने दिखाया है- दिखानेवाला भी है। कोई हठपर्ूवक देश को संघीयता में ले जाए, इससे देश की समस्याएँ हल नहीं होंगी। तर्सथ पहले भी हम लोगों ने इस विषय में जनता को सचेत और र्सतर्क किया है। भविष्य में भी करते रहेंगे। विरोध निरन्तर चलेगा। हमारा विरोध कार्यक्रम सफल-असफल जो हो, कल को संघीयता के दुष्परिणाम खुद उजागर होंगे। आज नहीं तो कल नेपाली जनता इस संघीयता को उखाडÞ फेंकेगी।
देश विभाजन का षड्यन्त्र
संघीयता से हम विखण्डन की ओर बढेंगे। एकात्मक शासन प्रणाली को संघीयता में ले जाने के परिणाम बहुत सारे हैं। इस बात को प्रमाणित करते हैं वे देश जिनके लिए संघीयता आवश्यक नही थी। एशिया, यूरोप में ऐसे अनेक देश हैं। तर्सथ संघीयता में जाने से देश खण्डित न होगा, जातिगत संर्घष्ा नहीं होगा- ऐसा नहीं कहा जा सकता। द्वन्द्व और देश विखण्डन के लिए ही तो संघीयता को लाने का प्रयास जारी है। विदेशी शक्ति देश को खण्डित करने के लिए सक्रिय है। नेपाली जनता इस बात को बखूबी जानती है। जनता जरुर एक रोज इस के विरोध में उतरेगी।
एकात्मक अर्न्तर्गत प्रदेश बनाया जा सकता है
र् वर्तमान की आवश्यकता है, सामन्त शासन अन्त्य, यह संघीयता से ज्यादा जरुरी है। विकेन्द्रीकरण को कडर्Þाई के साथ लागू करना होगा। स्थानीय शासन को मौलिक अधिकार की तरह नया संविधान में सुनिश्चित करना होगा। एकात्न्मक प्रणाली के तहत भी प्रदेश निर्माण सम्भव है। इस से भी जनता को अधिकार दिया जा सकता है। क्योंकि विश्व के १ सय ७० से भी ज्यादा देशों में एकात्मक राज्य प्रणाली द्वारा जनता को अधिकार दिया गया है। जातजाति, भाषाभाषी, धर्म, लिंग के आधार पर विभेद नहीं है। तर्सथ संघीयता में जाने पर ही जनता को अधिकार मिलेगा, विभिन्न जातजाति अधिकार सम्पन्न होंगे- ऐसा सोचना गलत है।
देश को बचाना हो और जनता को शक्तिशाली बनाना हो तो एकात्मक राज्य प्रणाली अर्न्तर्गत विकेन्द्रीकरण और स्थानीय सुशासन में जोड देना होगा। नए संविधान में स्थानीय जनता का मौलिक अधिकार सुव्यवस्थित होना चाहिए। केन्द्र सरकार उस में हस्तक्षेप न कर सके – इस तरिके से स्थानीय जनता का अधिकार सुनिश्चित करना होगा। इसी से देश की राष्ट्रियता, र्सवभौमसत्ता और अखण्डता की रक्षा हो सकती है। संघीयता में तो र्सार्वभौम सत्ता भी विभाजित हो सकती है। एक नेपाल जब अपनी र्सार्वभौमसत्ता और अखण्डता बचाने में परेशान है, तब छोटे-छोटे प्रदेश क्या खा-पीकर अपनी सेहत और जान बचाएंगे – इसलिए किसी भी दृष्टि से संघीय प्रणाली देश के लिए हितकर नहीं है। इस का दुष्परिणाम अभी से नजर आने लगा है। इसलिए इस को रोकने के लिए एकात्मक राज्य प्रणाली अर्न्तर्गत विकेन्द्रीकरण को व्यवस्थित करना तर्कसंगत, व्यावहारिक और हितकारी होगा। ±±±








