वह मां थी !
लक्ष्मी रुपल
दो वर्षबाद अखबार में उसने एक विज्ञापन देखा, जिसके अनुसार एक युवक के दोनों गर्ुर्दे खराब हो गए हैं और वह किसी भी दाता से एक गर्ुदा देने की पर््रार्थना करता है। बृद्धा ने उसकी सहायता करने का मन बना लिया और आश्रम वासियों के सहयोग से कुछ रुपये भी जमा कर लिए। वह निश्चित समय पर अस्पताल पहुँच गई। उसका एक गर्ुदा युवक के शरीर में प्रत्यारोपण कर दिया गया। कुछ स्वस्थ हो जाने पर युवक ने डाक्टर से कहा कि वह उस करुणामयी महिला के दर्शन करना चाहता है, जिसने उसे नयाँ जीवन दिया है। डाक्टर युवक को उस महिला के पास ले गया, जो अपना एक गर्ुदा देने के बाद अभी अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ कर रही थी। युवक का मुँह आर्श्चर्य से खुला रह गया। वह उसकी अपनी माँ थी। -लेखिकाः भारत के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार है) ±±±
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