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पहचान के आधार पर होना चाहिए:डा. ओम गुरुङ समाजशास्त्री

पहचान के आधार पर होना चाहिए
मेरे विचार में अधिकतम १० प्रदेश हो सकेत है। संख्या तो नितान्त प्राविधिक बात है। अभी इतना ही होगा, यह कहना उचित नहीं होगा। व्यावहारिकता को देखते हुए १४ से ज्यादा वा कम प्रदेश भी बन सकते हैं। प्रदेश कम होते ही राष्ट्र मजबूत होगा, मैं ऐसा नहीं मानता। स्रोत और साधन की व्यवस्था उपयुक्त ढंग से हो तो राष्ट्र मजबूत बन सकता है। मेरे विचार में पहचान और सामर्थ्य के साथ हीं भूगोल, जनसंख्या सब को मिलाने पर ९ से ११ प्रदेश बनाना उपयुक्त रहेगा।
मेरे विचार से ६ से ७ को पहचान के आधार पर बाँकी को सामर्थ्य, भूगोल और भाषा के आधार पर नामकरण किया जा सकता है। पहचान के आधार पर ही राज्य बनना चाहिए, यह कांग्रेस और एमाले का कथन है, यह विल्कुल गलत है। मेरा मानना है, राज्य कहना ही पहचान है। पहचान सब के साथ लगा हुआ रहता है। भूगोल को ही आधार मानने पर भी अमर्ूत भूगोल को आधार नहीं माना जा सकता। वहां रहनेवाले लोगों का पहचान होगा। सरकार द्वारा गठित राज्य पर्ुनर्सरचना आयोग सब को संतुष्टि देने में अर्समर्थ होगा। आयोग का निर्माण जिस तरिके से हुआ है, उस आधार पर कहा जा सकता है कि आयोग खास काम कर नहीं सकता है। आयोग में रहनेवाले लोग जनता का प्रतिनिधित्व नहीं करके सिर्फआपनी पार्टर्ीीा प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। राज्य पर्ुनर्सरचना सम्बन्धी समिति ने तय करके जो सैद्धान्तिक आधार दिया है, उसी के तहत रहकर सल्लाह-सुझाव देना चाहिए। सैद्धान्तिक आधार को कायम रखते हुए, विशुद्ध प्राविधिक सल्लाह देना वाञ्छनीय होगा।
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